

सीकर. चिकित्सा विभाग का स्टाॅप डायरिया कैम्पेन मंगलवार से शुरू हुआ। जिला मुख्यालय पर शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र नंबर तीन पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. अशोक महरिया, अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. हर्षल चौधरी, जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. विशाल सिंह, सहायक लेखा अधिकारी डाॅ. बजरंग सिंह बगड़िया, संस्थान की प्रभारी डाॅ. रूचिका पूनिया ने बच्चों को ओआरएस का घोल पिलाकर अभियान का शुभारंभ किया। इस मौके पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. अशोक महरिया ने बताया कि देश में पांच वर्ष से छोटे बच्चों की मृत्यु का एक कारण दस्त संबंधी रोग है। दस्त से देश में लगभग 4.8 प्रतिशत बच्चों की मृत्यु होती है। दस्त से होने वाली बाल मृत्यु को रोकने के लिए जिले में चिकित्सा विभाग की ओर से स्टाॅप डायरिया कैम्पेन 2025 शुरू किया गया। कैम्पेन एक जुलाई से 15 अगस्त तक चलेगा। कैम्पेन के तहत डायरिया की रोकथाम, सफाई और ओआरएस से रखें अपना ध्यान स्लोगन पर आधारित विभिन्न गतिविधियां होंगी।
उन्होंने बताया कि कैम्पेन के तहत चिकित्सा संस्थानों में ओरआरएस जिंक काॅर्नर स्थापित किए गए है। साथ ही प्रचार प्रसार सामग्री व उपचार प्लान पोस्टर का प्रदर्शन किया है। दस्त से होने वाली मृत्यु का मुख्य कारण निर्जलीकरण है। दस्त के कारण होने वाली बच्चों की मृत्यु को निर्जलीकरण का इलाज कर रोका जा सकता है। इसके लिए ओआरएस का उपयोग किया जाता है और दस्त के दौरान बच्चों को पर्याप्त पोषण के साथ जिंक की गोलियां दी जाती है। निरंतर स्तनपान, उचित और सुरक्षित पूरक आहार, सुरक्षित पेयजल का उपयोग, हाथ धोना, स्वच्छता और रोटा वाइरस का टीका लगवाकर दस्त को रोका जा सकता है।
एडीशनल सीएमएचओ डाॅ. हर्षल चौधरी ने बताया कि अभियान के दौरान आशा सहयोगिनियों द्वारा जिले के सभी पांच वर्ष से छोटे बच्चों को घर घर जाकर प्रति बच्चा दो ओआरएस पैकेट एवं 14 दिन की जिंक की खुराक का वितरण शुरू कर दिया गया है। साथ ही बच्चों के माता पिता एवं अभिभावकों को ओआरएव घोल बनाने की विधि की एवं जिंक की गोली के सेवन की विधि बताई जा रही है। जिले के मेडिकल काॅलेज, जिला अस्पताल, उप जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, उप स्वास्थ्य केन्द्रों तथा आंगनबाडी केन्द्रों पर ओआरएस-जिंक काॅर्नर स्थापित किए गए है। काॅर्नर पर ओआरएस घोल बनाने की विधि का प्रदर्शन एवं जिंक की गोली के सेवन की विधि बताई जा रही है। चिकित्सालयों की ओपीडी एवं आईपीडी में दस्त रोग के प्रबंधन व उपचार एसओपी के अनुसार किया जा रहा है।
आरसीएचओ डॉ. विशाल सिंह ने बताया कि गन्दा पानी के सेवन व बाहर का खाना खाने से भी बच्चों में दस्त रोग हो जाता है। इसलिए साफ पानी और घर पर बना गर्म खाना बच्चों को देना चाहिए। कार्यक्रम में चिकित्सा विभाग के सभी अधिकारी व कार्मिक मौजूद थे। कार्यक्रम में चिकित्सा विभाग के सभी अधिकारी व कार्मिक मौजूद थे।




